ग्रीन बिल्डिंग्स अभियान बनें जन-आंदोलन: डॉ. राजेश्वर सिंह ने दी हरित निर्माण को नई दिशा

“प्रकृति का गर्व बनें हमारे शहर”-ग्रीन बिल्डिंग्स सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह का भावुक आह्वान
“आज ही डालें हरित भविष्य की नींव”-ग्रीन एनर्जी को बताया पीढ़ियों के प्रति सामूहिक दायित्व

लखनऊ, सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को होटल ग्रैंड जेबीआर, गोमती नगर में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन (LMA) द्वारा आयोजित “ट्रांसफॉर्मिंग रियल एस्टेट इन उत्तर प्रदेश थ्रू ग्रीन बिल्डिंग्स” विषयक सम्मेलन में सहभागिता करते हुए ग्रीन बिल्डिंग्स को तकनीकी अवधारणा से आगे बढ़ाकर जन-आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ग्रीन एनर्जी अब विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने वायु प्रदूषण, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते AQI को भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा कि पर्यावरण संकट अब केवल वैज्ञानिक विमर्श का विषय नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और मानवीय अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है।

उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है, जिनमें से लगभग 24 लाख भारत में होती हैं। “अर्थ ओवरशूट डे” का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 1972 में यह दिन 26 दिसंबर था, जबकि अब यह अगस्त के पहले सप्ताह तक आ चुका है, जो यह दर्शाता है कि मानवता प्रकृति की क्षमता से कहीं अधिक उपभोग कर रही है।

ग्रीन बिल्डिंग्स केवल तकनीक नहीं, सामाजिक आंदोलन हैं

डॉ. सिंह ने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग्स महज़ निर्माण तकनीक नहीं, बल्कि सतत जीवनशैली का दर्शन हैं। उन्होंने कहा,
“हर नागरिक को यह गर्व होना चाहिए कि उसका घर, उसकी सोसायटी, उसका बाज़ार और उसका शहर ग्रीन है। यही सोच इस आंदोलन को जन-आंदोलन बनाएगी।”

उन्होंने बताया कि ग्रीन बिल्डिंग्स से 30–40 प्रतिशत ऊर्जा बचत और 20–30 प्रतिशत जल संरक्षण संभव है। उन्होंने कहा कि जब देश की लगभग 70 प्रतिशत इमारतें अभी बननी शेष हैं, तब यही सबसे निर्णायक समय है कि ग्रीन कंस्ट्रक्शन को मुख्यधारा में लाया जाए।

डॉ. सिंह ने सरकार से आग्रह किया कि ग्रीन बिल्डिंग्स को बढ़ावा देने हेतु अधिक कर छूट, कम ब्याज दर पर ऋण, FAR में वृद्धि और संपत्ति कर में रियायत जैसे प्रोत्साहनों को और मजबूत किया जाए, ताकि यह मॉडल आर्थिक रूप से भी आकर्षक बने।

योगी सरकार के नेतृत्व में यूपी बना हरित परिवर्तन का अग्रदूत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने ग्रीन बिल्डिंग कोड अपनाकर देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है और 22,000 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो भारत के नेट ज़ीरो 2070 संकल्प के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि नीति, नियमन और राजनीतिक इच्छाशक्ति—तीनों स्तरों पर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है, जो हरित विकास को केवल नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय लक्ष्य बनाती है।

सरोजनीनगर बना हरित विकास का मॉडल

अपने क्षेत्र सरोजनीनगर के प्रयासों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि क्षेत्र में 160 से अधिक तारा शक्ति केंद्रों के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त किया गया है। इन केंद्रों में 2000 से अधिक सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं और अब तक 30,000 से अधिक इको-फ्रेंडली स्कूल बैग तैयार कर प्राथमिक विद्यालयों में वितरित किए गए हैं, जिससे प्लास्टिक उपयोग में ठोस कमी आई है।

उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय में सोलर हेल्प डेस्क संचालित है और लखनऊ की कुल 120 मेगावाट सौर क्षमता में से 60 मेगावाट से अधिक अकेले सरोजनीनगर में स्थापित की जा चुकी है।

इसके अतिरिक्त उन्होंने शिविरी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 2100 मीट्रिक टन कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है और इसके माध्यम से लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन रहा है, जो अपने संपूर्ण कचरे को ऊर्जा में बदलने की दिशा में अग्रसर है।

नीति स्तर पर आगे बढ़ेंगे सम्मेलन के सुझाव

सम्मेलन को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट LMA ए.के. माथुर, अमित श्रीवास्तव (चेयरमैन, इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल – लखनऊ चैप्टर), जय कुमार गुप्ता (जनरल मैनेजर, SIDBI), अशोक कुमार, राज वर्मा, आर्किटेक्ट एस.के. सारस्वत, प्रवीन कुमार द्विवेदी सहित अनेक विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सम्मेलन से प्राप्त सुझावों और विचारों को नीति स्तर पर गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश को हरित, स्वच्छ और सतत विकास का मॉडल राज्य बनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “आज यदि हमने सही दिशा में कदम रख दिए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें विकास नहीं, बल्कि दूरदर्शिता के लिए याद करेंगी।”

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