भारत के सनातन धर्म और संस्कृति को मिटाना आसान नहीं: अमित शाह

गांधीनगर जिले के मानसा में 267 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह

अहमदाबाद, 13 जनवरी । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमनाथ मंदिर के बार-बार विनाश और पुनर्निर्माण का उल्लेख करते हुए मंगलवार को कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और लोगों की आस्था को मिटाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर पर हमला करने वाले आक्रमणकारी इतिहास में विलुप्त हो गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में समुद्र तट पर उसी स्थान पर गर्व से खड़ा है।

गांधीनगर जिले के मानसा में 267 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर पहला हमला करीब एक हजार वर्ष पहले महमूद गजनी ने किया था। इसके बाद भी इस मंदिर को 16 बार नष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ।

उन्होंने कहा, “एक हजार साल बाद भी, 16 बार ध्वस्त किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज शान से खड़ा है और उसका ध्वज आसमान में लहरा रहा है। वहां भव्य सोमनाथ कॉरिडोर का निर्माण भी किया जा रहा है। यह पूरी दुनिया के लिए संदेश है कि भारत का सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और लोगों की आस्था सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर है।”

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जनवरी को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का उद्घाटन किया था, जिसे पूरे एक वर्ष तक मनाया जाएगा। इस दौरान देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य भारत की चेतना को जागृत करना और सनातन धर्म की जड़ों को समाज के सबसे निचले स्तर तक मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि महमूद गजनी के बाद अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब जैसे आक्रमणकारियों ने भी सोमनाथ मंदिर पर हमले किए, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। शाह ने कहा, “विनाश करने वालों की सोच विनाश में विश्वास रखने वाली थी, जबकि निर्माण करने वालों की आस्था सृजन में थी। आज वे विनाशक इतिहास में खो गए हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी समुद्र के सामने गर्व से खड़ा है।”

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी, जामनगर के महाराजा और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि इन नेताओं का मानना था कि सोमनाथ पर हमला केवल एक मंदिर पर नहीं, बल्कि भारत की आस्था, धर्म और आत्मसम्मान पर हमला था, और इसका उत्तर आत्मसम्मान की रक्षा में निहित है।

अन्य विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए शाह ने अपने गृह नगर मानसा में एक खेल परिसर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों को ध्यान में रखते हुए इस परिसर में और सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। इसके लिए उन्होंने सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व) कोष के माध्यम से 15 करोड़ रुपये जुटाने का निर्णय लिया है।

शाह ने कहा कि गुजरात सरकार अहमदाबाद को ‘स्पोर्ट्स हब सिटी’ के रूप में विकसित कर रही है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान कई देशों के खिलाड़ी अहमदाबाद आएंगे और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के अधिकार हासिल करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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