लखनऊ, छह जनवरी । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि दशकों तक देश के संसाधनों को लूटने वाले दल अब ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लाए गए एक पारदर्शी और सुधारात्मक कानून को लेकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम-2025 को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैला रहा है।
लखनऊ में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह संवाद वीबी-जी राम जी अधिनियम को लेकर फैले भ्रम को दूर करने के लिए आयोजित किया गया है। यह नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्थान लेता है और ग्रामीण विकास को अधिक पारदर्शी, टिकाऊ और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
आदित्यनाथ ने कहा, “जिन लोगों ने दशकों तक गरीबों और युवाओं को भूख व पलायन की ओर धकेला, वे आज ग्रामीण भारत को मजबूत करने वाले सुधारों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्हें डर है कि पारदर्शिता से उनकी पुरानी नाकामियां उजागर हो जाएंगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी, भुगतान में देरी, कमजोर सामाजिक अंकेक्षण और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से ग्रस्त रहा और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण में असफल रहा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। मजदूरों को साप्ताहिक भुगतान, भुगतान में देरी होने पर अनिवार्य मुआवजा और मांग पर काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल रोजगार नहीं, बल्कि आजीविका की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी अवसंरचना निर्माण सुनिश्चित करता है।
नए कानून की रूपरेखा बताते हुए उन्होंने कहा कि कार्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है, जिनका चयन ग्राम प्रधान स्थानीय जरूरतों के अनुसार करेंगे। इनमें जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, चेक डैम, ग्रामीण सड़कें, नालियां, खेल मैदान, ओपन जिम, बाजार, मंडियां, आपदा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य शामिल हैं। खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक कार्य स्थगित करने का अधिकार भी दिया गया है।
आदित्यनाथ ने कहा कि नए ढांचे के तहत हर छह महीने में अनिवार्य ‘सोशल ऑडिट’, डिजिटल और समयबद्ध शिकायत निवारण, जिला स्तर पर लोकपाल तथा मानकों के अनुरूप ऑडिट की व्यवस्था की गई है। केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय साझेदारी 60:40 रहेगी और योजना पूरी तरह मांग आधारित होगी। उन्होंने दावा किया कि इस नई व्यवस्था से राज्यों को मनरेगा की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान हुए कथित मनरेगा घोटालों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोनभद्र सहित कई मामलों में सीबीआई जांच हुई थी और अब यह नया कानून उस “खुदाई-भराई” की संस्कृति का अंत करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्रिमंडल का आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस अधिनियम को पूरी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की 57,600 से अधिक ग्राम पंचायतों और 1.05 लाख से अधिक राजस्व गांवों में रहने वाली 67–70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के लिए यह कानून सुरक्षा, सम्मान और खुशहाली की नई नींव रखेगा।
