यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट पर 275 पूर्व न्यायाधीशों और अधिकारियों का कड़ा विरोध, आरएसएस पर प्रतिबंध की सिफारिश को बताया ‘निंदनीय’

नई दिल्ली, 21 मार्च। भारत के 275 पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ नौकरशाहों और सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अमेरिका के United States Commission on International Religious Freedom (अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग – यूएससीआईआरएफ) की हालिया रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे निहित स्वार्थों से प्रेरित और अत्यधिक पक्षपातपूर्ण बताया है।

इस रिपोर्ट में Rashtriya Swayamsevak Sangh (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व अधिकारियों ने इसे भारत की छवि धूमिल करने का प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट ‘‘बौद्धिक दिवालियापन और विकृत निष्कर्षों’’ को दर्शाती है।

शनिवार को जारी संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने अमेरिका सरकार से आग्रह किया कि वह इस रिपोर्ट में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की जांच कराए। उनका कहना था कि यूएससीआईआरएफ के आयुक्तों की नियुक्ति अमेरिकी सरकार द्वारा की जाती है और उन्हें अमेरिकी कांग्रेस के माध्यम से वित्त पोषण मिलता है, ऐसे में रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बयान में कहा गया कि यूएससीआईआरएफ द्वारा भारतीय नागरिकों की संपत्ति जब्त करने, आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने और आरएसएस से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध की सिफारिश करना भारत की संप्रभुता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इसे ‘‘भारत विरोधी एजेंडा’’ को बढ़ावा देने का प्रयास बताया।

पूर्व अधिकारियों ने यह भी कहा कि यूएससीआईआरएफ की प्रवृत्ति रही है कि वह भारतीय संस्थानों और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों को पर्याप्त संदर्भ और साक्ष्य के बिना नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे विश्लेषणात्मक संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां एक मजबूत न्यायिक प्रणाली, सक्रिय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संसदीय निगरानी व्यवस्था मौजूद है। ऐसी स्थिति में धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में दोषियों का बिना दंड के बच निकलना बेहद कठिन है।

इस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत और सुनील अरोड़ा, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल तथा पूर्व राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के महानिदेशक योगेश चंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस और सैन्य अधिकारी शामिल हैं।

यह संयुक्त बयान पूर्व राजदूत भास्वती मुखर्जी और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एम. मदन गोपाल के समन्वय से जारी किया गया।

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