प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री से वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के ऋण माफ करने का अनुरोध किया

प्रियंका गांधी

वायनाड (केरल), 24 जनवरी । कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर पत्र लिखकर वायनाड के मुंडक्कई-चूरलमाला भूस्खलन पीड़ितों द्वारा लिए गए ऋणों को माफ करने के निर्देश देने का आग्रह किया है। कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पार्टी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री से आपदा राहत कार्यों के लिए केरल सरकार को दिए गए ऋणों को अनुदान में परिवर्तित करने का भी अनुरोध किया है। बयान के अनुसार, मुंडक्कई-चूरलमाला भूस्खलन के संबंध में वायनाड को कोई केंद्रीय सहायता नहीं मिलने के बाद केरल के सभी सांसदों ने दिसंबर 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी।

इसके बाद फरवरी 2025 में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि भूस्खलन के छह महीने बाद पुनर्वास के लिए ऋण के रूप में धन उपलब्ध कराना “अन्यायपूर्ण और अमानवीय” है। उन्होंने विशेष रूप से उन जीप और ऑटो रिक्शा चालकों, छोटे व्यापारियों और होमस्टे संचालकों के ऋण माफ करने का अनुरोध किया था, जिनकी आजीविका इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गई।

वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पिछले वर्ष अक्टूबर में भी प्रधानमंत्री को एक अन्य पत्र के माध्यम से यही मांग दोहराई थी। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से भी आग्रह किया था कि वह अपनी वैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए बैंकों को आपदा पीड़ितों के ऋण माफ करने का निर्देश दे।

बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने अदालत में यह रुख अपनाया था कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन के बाद ऋण माफी संभव नहीं है। हालांकि, केरल उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि संविधान के अनुच्छेद 73 के तहत केंद्र सरकार को ऋण माफी के संबंध में कोई बाधा नहीं है। उल्लेखनीय है कि संविधान का अनुच्छेद 73 केंद्र सरकार की कार्यकारी शक्तियों की सीमा को परिभाषित करता है।

गौरतलब है कि जुलाई 2024 में वायनाड के मुंडक्कई-चूरलमाला क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन में 200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों घर पूरी तरह नष्ट हो गए थे, जिससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि हुई थी।

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