पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं खेल प्रशासक सुरेश कलमाड़ी का निधन

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं खेल प्रशासक सुरेश कलमाड़ी का निधन

पुणे, छह जनवरी । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रख्यात खेल प्रशासक सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार तड़के पुणे में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सुबह करीब 3:30 बजे अंतिम सांस ली।

राजनीति और खेल प्रशासन—दोनों क्षेत्रों में कलमाड़ी का लंबा और प्रभावशाली करियर रहा। भारत के सबसे प्रभावशाली खेल प्रशासकों में शुमार कलमाड़ी दो दशकों से अधिक समय तक विभिन्न भूमिकाओं में सक्रिय रहे। भारतीय खेल जगत पर उनकी मजबूत पकड़ ने जहां कई उपलब्धियां दिलाईं, वहीं विवाद भी उनके करियर का हिस्सा रहे।

1944 में मद्रास में जन्मे सुरेश कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र थे और 1971 के भारत–बांग्लादेश युद्ध में वायु सेना के पायलट के रूप में भी उन्होंने सेवा दी। उनका राजनीतिक सफर 1982 में सांसद बनने के साथ शुरू हुआ। उन्होंने चार बार राज्यसभा और तीन बार लोकसभा में पुणे का प्रतिनिधित्व किया।

शरद पवार की नजर पड़ने के बाद उनका राजनीतिक कद बढ़ा। वह पुणे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने और बाद में संजय गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे। 1980 के दशक में कांग्रेस विभाजन के बाद भी उन्होंने पार्टी के साथ बने रहना चुना और 1982, 1988, 1994 व 1998 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।

पी. वी. नरसिंह राव सरकार में 1995–96 के दौरान उन्होंने रेल राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वह रेल बजट प्रस्तुत करने वाले एकमात्र रेल राज्य मंत्री रहे। उनके कार्यकाल में पुणे रेलवे मंडल की स्थापना हुई और शहर से कई लंबी दूरी की ट्रेनों की शुरुआत की गई।

1997 में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने ‘पुणे विलास अघाड़ी’ नाम से नई पार्टी बनाई। उस चुनाव में भाजपा ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ उनका समर्थन किया और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके पक्ष में प्रचार किया, हालांकि कलमाड़ी चुनाव हार गए।

कलमाड़ी 1996 से 2011 तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष रहे। 2010 के नयी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते 2011 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि, इस वर्ष अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।

उनके नेतृत्व में 2010 राष्ट्रमंडल खेल (दिल्ली), 2008 राष्ट्रमंडल युवा खेल (पुणे) सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का सफल आयोजन हुआ। उन्होंने पुणे को आईटी, औद्योगिक और खेल केंद्र के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। बालेवाड़ी खेल परिसर, पुणे महोत्सव, पुणे अंतरराष्ट्रीय मैराथन, पुणे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और पुणे मेट्रो परियोजना की मंजूरी उनकी प्रमुख पहलें रहीं। शहर के विकास के लिए उन्होंने लगभग 2,500 करोड़ रुपये की केंद्रीय निधि भी सुनिश्चित कराई।

परिवार में उनकी पत्नी, बेटा-बहू, दो विवाहित बेटियां, दामाद और पोते-पोतियां हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार, भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और सांसद मुरलीधर मोहोल सहित विभिन्न दलों के नेता कार्वे रोड स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार दोपहर बाद नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशान में किया गया।

राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश ने एक अनुभवी नेता खो दिया है, जिन्होंने संघर्षों से भरा सार्वजनिक जीवन जिया और लोकतांत्रिक मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने शोक संदेश में कहा कि कलमाड़ी के निधन से पुणे के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।

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