उप्र पुलिस का ‘यूपीकॉप ऐप’ बना आमजन का डिजिटल सहारा, घर बैठे एफआईआर समेत 27 सेवाएं उपलब्ध

उप्र पुलिस का ‘यूपीकॉप ऐप’ बना आमजन का डिजिटल सहारा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘यूपीकॉप ऐप’ और नागरिक पोर्टल अब आम लोगों के लिए एक ‘डिजिटल पुलिस थाना’ की तरह काम कर रहा है। इसके माध्यम से नागरिक न सिर्फ घर बैठे प्राथमिकी दर्ज करा रहे हैं, बल्कि थाने जाए बिना 27 प्रकार की पुलिस सेवाओं का लाभ भी उठा रहे हैं। यह जानकारी रविवार को एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से दी गई।

रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पुलिसिंग को जनकेंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए तकनीक से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश पुलिस डिजिटल माध्यमों के जरिए आमजन की सेवा में नई मिसाल कायम कर रही है।

डीजीपी ने बताया कि ‘यूपीकॉप ऐप’ ने थानों के चक्कर लगाने की मजबूरी को काफी हद तक कम कर दिया है। साथ ही ऐप के माध्यम से मिलने वाली सेवाओं के निस्तारण की समय-सीमा में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

बयान के अनुसार, ऐप के जरिए नागरिक ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराने, एफआईआर की कॉपी डाउनलोड करने, खोए हुए सामान की रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ-साथ चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन समेत कुल 27 प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक अब तक 50 लाख से अधिक लोग ‘यूपीकॉप ऐप’ डाउनलोड कर चुके हैं। ऐप के माध्यम से 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर की प्रतियां डाउनलोड की जा चुकी हैं, जबकि 7.3 लाख से अधिक लोगों ने खोए हुए सामान की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज कराई है। ये आंकड़े राज्य में डिजिटल पुलिसिंग को लेकर सरकार की सोच और उसकी प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि ऐप में कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। रीयल-टाइम नोटिफिकेशन के माध्यम से आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति की तुरंत जानकारी मिल रही है। यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे हर वर्ग के लोग इसका आसानी से उपयोग कर पा रहे हैं।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से ऐप में लोकेशन ट्रैकिंग और एसओएस बटन जैसी सुविधाओं को अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा नजदीकी पुलिस थाने को मैप पर देखने की सुविधा भी दी गई है, जो आपात स्थिति में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

डीजीपी ने बताया कि डिजिटल प्रक्रिया के चलते सेवाओं के निस्तारण में लगने वाले समय में भारी कमी आई है। वर्तमान में चरित्र सत्यापन में औसतन छह दिन का समय लग रहा है, जबकि पहले इसमें करीब आठ दिन लगते थे। इसी तरह किरायेदार सत्यापन में अब लगभग आठ दिन लग रहे हैं, जो पहले 24 से 25 दिन तक का समय लेता था। कर्मचारी सत्यापन की प्रक्रिया अब करीब पांच दिन में पूरी हो रही है, जबकि पहले इसमें 13 दिन तक लग जाते थे।

उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘यूपीकॉप ऐप’ राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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