उन्नाव दुष्कर्म मामला: अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने के लिए पीड़िता ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया

उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे

नयी दिल्ली, 15 जनवरी : उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से दायर अपील के सिलसिले में पीड़िता ने अतिरिक्त तथ्य और दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने के लिए गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। पीड़िता ने अदालत से अनुरोध किया है कि हालिया घटनाक्रमों और स्वयं तथा उसके परिवार की सुरक्षा से जुड़े तथ्यों पर भी विचार किया जाए।

भाजपा से निष्कासित किए जा चुके पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की अपील में दायर अर्जी में पीड़िता ने कहा कि वह ऐसे तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत करना चाहती है, जो न केवल मामले से जुड़े हैं बल्कि उससे और उसके परिवार को उत्पन्न खतरे को भी दर्शाते हैं।

अर्जी में यह भी मांग की गई है कि उन्नाव स्थित उसके स्कूल के दो अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएं, जिससे उसकी जन्मतिथि का सत्यापन किया जा सके। पीड़िता ने आरोप लगाया कि सेंगर ने जांच को प्रभावित किया और मुकदमे के दौरान उसकी उम्र से संबंधित फर्जी और झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, जिन्हें अब अपील में भी आधार बनाया गया है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि चूंकि सेंगर की अपील सुनवाई के अंतिम चरण में है, इसलिए पीड़िता की अर्जी पर विचार के लिए 25 फरवरी की तारीख तय की गई है। अदालत ने पीड़िता के वकील को 31 जनवरी तक सभी संबंधित दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया और सेंगर तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को इस पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया था। अदालत ने कहा था कि वह पहले ही सात साल पांच महीने की सजा काट चुका है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने पारित किया था। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने 29 दिसंबर 2025 को इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

उन्नाव दुष्कर्म मामले में सेंगर को दिसंबर 2019 में निचली अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अपील के लंबित रहने तक उच्च न्यायालय ने उनकी सजा निलंबित की थी।

सेंगर को 2017 में नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ बलात्कार का दोषी ठहराया गया था। इसके अलावा पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सेंगर को 10 साल की कैद की सजा सुनाई गई है, जिसमें उन्हें जमानत नहीं मिली है।

उल्लेखनीय है कि इस दुष्कर्म मामले और इससे जुड़े अन्य मामलों को एक अगस्त 2019 को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर उत्तर प्रदेश की अदालत से स्थानांतरित कर दिल्ली की अदालत में सुनवाई के लिए भेजा गया था।

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