अयोध्या में राम भक्तों का अभिनंदन करेगा भरत द्वार, फरवरी में हो सकता है उद्घाटन

अयोध्या, 29 जनवरी। अयोध्या आने वाले राम भक्तों के स्वागत के लिए अयोध्या–सुल्तानपुर मार्ग (मैनुदीनपुर–प्रयागराज मार्ग) पर भव्य भरत द्वार का निर्माण तेज़ी से चल रहा है। योगी सरकार की महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजनाओं में शामिल इस प्रवेश द्वार का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और फरवरी 2026 तक उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है।

पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना को यू.पी. प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। 4.410 हेक्टेयर क्षेत्र में बन रहे इस द्वार पर कुल 2024.90 लाख रुपये की लागत आ रही है। परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा के अनुसार, शेष निर्माण कार्यों को अगले माह तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

भरत द्वार अयोध्या में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रथम स्वागत स्थल होगा। यह द्वार भगवान राम के भ्राता भरत की भक्ति, त्याग और मर्यादा का प्रतीक बनेगा और श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से रामायण काल से जोड़ेगा।

छह प्रमुख मार्गों पर बन रहे रामायण-थीम प्रवेश द्वार

राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से योगी सरकार द्वारा शहर से जुड़ने वाले छह प्रमुख मार्गों पर रामायण-थीम आधारित प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं। इनमें राम द्वार, लक्ष्मण द्वार, भरत द्वार, शत्रुघ्न द्वार, सीता द्वार और हनुमान द्वार शामिल हैं। भरत द्वार इसी श्रृंखला का अहम हिस्सा है।

इस द्वार में रामायण काल से प्रेरित मूर्तियां, कलात्मक नक्काशी, भव्य प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जो श्रद्धालुओं को त्रेता युग की अनुभूति कराएंगी।

भक्तों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर विकास

राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। ऐसे में भव्य प्रवेश द्वारों के निर्माण से न केवल यातायात व्यवस्था सुगम होगी, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

बुनियादी सुविधाओं का भी हो रहा विकास

परियोजना के अंतर्गत आसपास हरित क्षेत्र, पार्किंग, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। स्थानीय कारीगरों, वास्तुकारों और इंजीनियरों की भागीदारी से पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक तकनीक का समन्वय किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

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